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मेरे गुनाहों की सजा दे दो-shayari sangrah

हिंदी शायरी मस्ती मनोरंजन

मेरे गुनाहों की सजा दे दो गलतियों को माफ कर वफा दे दो तुमसे रूबरू होकर उम्र गुजर जाए अपने दिल में जगह दे दो

ख्वाब पूरे होने लगे हैं तुम्हारे प्यार में जीना सीखने लगे हैं खुशियों की महफिल सजने लगी है चाहतों की तरह जिंदगी सवरने लगी है

हर सवाल का जवाब मिल गया खुशियों का शबाब मिल गया अपने को खुशनसीब महसूस करता हूं जो वक्त रहते हैं उनका प्यार मिल गया

वफा की दहलीज से कदम नहीं हटाएंगे वादा किया है साथ निभाएंगे कर्तव्य से पीछे नहीं हटेंगे हर मुश्किल से निजात के लिए संभव तरीका अपनाएंगे

मेरे दिल की धड़कनों में प्यार रहता है जिंदगी के असलियत से रूबरू हो गया हूं मन के हर मंजर में खुशियों का माहौल रहता है

जिंदगी से तन्हाई खत्म हो गई है जीवनशैली में हकीकत की रस्म हो गई है मुझे सफल होने का रास्ता मिल गया है

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